As a poet who writes in both Hindi and English, sometimes I feel more for one language! Sometimes the alankars and chhand manage to pull me away from English verses and ask me, whether it’s possible to convey so many meanings in a line, with any language other than Hindi. And then I get drowned in Hindi , diving deep into its ocean bed emerging with pearls , only to find English waiting at the shore asking for translations. One look into my eyes , and it knows , this time its just not possible….
, “satya ka koi arth nahi,
kis arth se bandhengen sabhi?”
The beauty of arth appearing twice with two meanings (first meaning and second money) (yamak alankar) and the second ‘arth’ itself having both meanings (shlesh alankar). There could be an English translation:
“Truth has no meaning, so will mankind bond through money or any other meaning…”
But alas! the beauty will be lost!!
Testimonials
तृप्ति एक बेहद संवेदनशील कवयित्री हैं। ऐसा सिर्फ इनकी कविताएं पढ़कर ही नहीं बल्कि इनकी कला को देखकर कोई भी सहज रूप से कह सकता है। तृप्ति ने अपने आस-पास से बिम्बों-प्रतीकों को लेकर ऐसी रोचक कविताएं लिखी हैं,जो जीवन को बेहतर दिशा देती हैं और मानवीय गुणों,सहजता और सरलता का सन्देश बड़ी खूबसूरती से पाठकों तक पहुंचाती हैं। तृप्ति की कविताएं दिल की धड़कनों-सी नाज़ुक,पर धड़कनों की ही तरह प्राण फूंकने वाली हैं जो काफी सशक्त और दिल को अपनी गिरफ्त में लेने वाली बन पड़ी हैं। कहने की जरुरत नहीं है कि तृप्ति की कविताओं की भाषा- शैली का एक अपना ही अंदाज़ है,जो सबसे अलग है,वह पाठक को अंत तक बांधे रखती है। जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों,प्रेम,परिवार के वात्सल्य,पर्यावरण और प्रकृति जैसे विषयों पर लिखी गई इन कविताओं की विशेषता है कि ये एकाकी और व्यक्तिगत दृष्टि से ऊपर उठकर समष्टिगत दृष्टि से रची गई हैं।
रणविजय राव कवि ,व्यंगकार संपादक, लोक सभा सचिवालय , भारत
तृप्ति की रचनाओं की ताक़त और आकर्षण ऐसा है जो पाठकों को अपने साथ बांधे रखने में सक्षम है। ये कविताएं मन को स्पंदित करतीं हैं । बल्कि हौले से स्पर्श करतीं है। इस रचना (कलसी का पानी) यात्रा से गुज़रते हुए मन को बेहद सुकून मिला। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ की इनकी रचनाएँ मन को झंकृत करतीं हैं और इनमे आत्मीय-आनंद है! साथ ही साथ इनमे नए ज़माने का अंदाज़ और स्वर भी है। रचनाकार की भावनाएं कोमल हैं, जो अपने पाठकों का ध्यान अवश्य केंद्रित करेगी।
लालित्य ललित कवि ,व्यंगकार संपादक, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत